GIMS Noida News : राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन अब अत्यंत उग्र और संवेदनशील स्थिति में पहुंच गया है। बुधवार को हड़ताल के 10वें दिन प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने दोपहर में अपने खून से पत्र लिखकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की मांग की। मामले के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए एडीएम प्रशासन मंगलेश दुबे, एडीसी संतोष कुमार और जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता ने धरना स्थल पर पहुंचकर कर्मचारियों के साथ लगभग ढाई घंटे लंबी चर्चा की। हालांकि, इस बैठक में संविदा पर नियुक्ति की प्रमुख मांग को प्रबंधन ने पूरी तरह से ठुकरा दिए जाने के कारण बातचीत पूरी तरह असफल रही। कर्मचारियों का कहना है कि 27 जून को मुख्यमंत्री का गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में दौरा निर्धारित है, जिस वजह से जिला प्रशासन और पुलिस उन पर हड़ताल खत्म करने का व्यापक दबाव बना रहे हैं। पुलिस कार्रवाई से बवाल, 10 घायल बुधवार की रात जिम्स परिसर शिविर में बदल गया। कर्मचारियों का कहना है कि बातचीत निष्फल रहने के बाद पुलिस ने जिम्स के मेन हॉल में शांतिपूर्ण बैठकों में शामिल प्रदर्शनकारियों पर लाठियां चलानी शुरू कर दीं। इस अचानक के लाठीचार्ज में करीब 10 कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुए, जिन्हें पुलिस ने जबरन उठाकर 17 नंबर ओपीडी के सामने भेज दिया। इस घटना के दौरान हड़ताल स्थल के सभी सीसीटीवी कैमरे बंद करने का भी गंभीर आरोप लगा है। कर्मचारियों ने बताया कि पुलिस ने न केवल उनके साथ बुरा व्यवहार किया, बल्कि घटना का वीडियो बना रहे युवाओं से उनके मोबाइल फोन भी छीनने की कोशिश की। नाराज कर्मचारियों ने अब घोषणा की है कि वे इस विरोध में बृहस्पतिवार को अपनी शैक्षणिक डिग्रियों को जलाकर प्रदर्शन करेंगे। वीडियो वायरल, मारपीट का आरोप इस पूरे घटनाक्रम के बाद इंटरनेट मीडिया पर कई वीडियो तेजी से फैलने लगे हैं। वायरल वीडियो में कुछ महिला कर्मचारी रोते हुए यह आरोप लगाती दिखाई दे रही हैं कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की और उन्हें लात भी मारी गई। एक अन्य वीडियो में पथरी के unbearable दर्द से पीड़ित एक स्टाफ नर्स को सुरक्षाकर्मियों द्वारा मुख्य गेट के भीतर जाने से रोकते हुए और पीछे खींचते हुए देखा जा रहा है। इस दौरान जिम्स प्रशासन ने मुख्य गेट के साथ-साथ इमरजेंसी गेट भी पूरी तरह बंद कर दिया था, जिससे उपचार के लिए आए गंभीर मरीजों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा और वहां मौजूद तीमारदारों ने जोरदार हंगामा किया। कोविड सेवाकर्मी संविदा मांग पर अड़े उल्लेखनीय है कि जिम्स के ये आउटसोर्स कर्मचारी अपनी नौकरी को नियमित करने या सीधे संविदा (कॉन्ट्रेक्ट) पर रखने की मांग को लेकर 15 जून से लगातार हड़ताल पर हैं। आंदोलनकारी कहते हैं कि उन्होंने कोविड महामारी के दुःखद समय में अपनी जान की परवाह किए बिना और परिवारों से दूर रहकर दिन-रात अस्पताल में सेवाएं दी थीं। उस संकट के दौरान प्रशासन ने उन्हें आश्वस्त किया था कि भविष्य में सभी को नियमित किया जाएगा, लेकिन अब उनके साथ धोखा किया जा रहा है। कई दौर की आधिकारिक बैठकों के बाद भी कोई ठोस समाधान न निकलने से कर्मचारियों में काफी आक्रोश व्याप्त है। ये भी पढ़े : दादरी के 7 गांवों की जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया तेज, रेलवे ने जारी की 20-ई अधिसूचना